बिहार में कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल: मोतिहारी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
Bihar Deputy CM Samrat Choudhary (Image credit X.com)
By राजेश्वर जायसवाल
मोतिहारी सभा में कथित चेन स्नैचिंग के बाद बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल, सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज
पटना | मई 2026
बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में आयोजित एक राजनीतिक सभा के दौरान कथित तौर पर कई लोगों की चेन स्नैचिंग की घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब Tejashwi Yadav की मोतिहारी यात्रा के दौरान भीड़भाड़ वाली सभा में कई लोगों के गले से सोने की चेन छीने जाने का दावा किया गया।
स्थानीय स्तर पर सामने आई चर्चाओं के अनुसार, शुरुआत में लगभग छह लोगों के चेन छीने जाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में संख्या बढ़कर दस से अधिक होने की चर्चा होने लगी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की ओर से होना बाकी है।
भीड़भाड़ वाले आयोजनों में संगठित गिरोहों की आशंका
घटना को लेकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस तरह की वारदातें अक्सर संगठित गिरोहों द्वारा अंजाम दी जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे गिरोह भीड़भाड़ वाले राजनीतिक कार्यक्रमों, मेलों और सार्वजनिक आयोजनों को निशाना बनाते हैं, जहां अफरा-तफरी और भीड़ का फायदा उठाकर जेवरात या कीमती सामान पर हाथ साफ किया जाता है।
चर्चा में यह भी कहा गया कि एक या दो लोग इतनी बड़ी संख्या में घटनाओं को अंजाम नहीं दे सकते, बल्कि इसके पीछे 10–15 लोगों के नेटवर्क के सक्रिय होने की संभावना हो सकती है।
Bihar Encounters: BJP MLA Anand Mishra Backs Police Crackdown
हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी संगठित गिरोह की पुष्टि नहीं की जा सकती।
“वीडियो होने के बाद भी कार्रवाई नहीं” — स्थानीय अनुभवों से बढ़ी नाराजगी
कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता केवल इस घटना तक सीमित नहीं है। कई नागरिकों का कहना है कि पहले भी चेन स्नैचिंग जैसी घटनाओं के वीडियो और सबूत सामने आने के बावजूद कार्रवाई अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी।
स्थानीय अनुभवों में बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाए जाने और घटनाओं के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई धीमी रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इसी कारण लोगों के बीच यह मांग उठ रही है कि केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर संगठित अपराध नेटवर्क पर विशेष अभियान चलाया जाए।
सरकार और पुलिस के सामने चुनौती
बिहार सरकार और राज्य पुलिस के सामने अब चुनौती केवल घटनाओं के बाद गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए स्थायी तंत्र विकसित करने की भी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसके लिए कुछ कदम अहम हो सकते हैं:
- राजनीतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था
- भीड़ प्रबंधन और CCTV कवरेज बढ़ाना
- संगठित चेन स्नैचिंग गिरोहों की पहचान और डेटा बेस तैयार करना
- सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती
- त्वरित शिकायत और ट्रैकिंग प्रणाली
चुनावी राज्य में कानून-व्यवस्था बन सकती है बड़ा मुद्दा
बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी माहौल को देखते हुए कानून-व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
यदि भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सुरक्षा को लेकर सवाल बढ़ते हैं, तो विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के लिए यह संवेदनशील विषय बन सकता है।
फिलहाल मोतिहारी की कथित घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य में छोटे लेकिन संगठित अपराध नेटवर्कों के खिलाफ अधिक सख्त और समन्वित कार्रवाई की जरूरत है?
Follow The Raisina Hills on WhatsApp, Instagram, YouTube, Facebook, and LinkedIn