हर्ष मल्होत्रा को मिली दिल्ली बीजेपी की जिम्मेदारी, अब असली परीक्षा शुरू
दिल्ली बीजेपी की कमान संभालते ही हर्ष मल्होत्रा के सामने खड़ी हुईं कई बड़ी चुनौतियां (Image Harsh Malhotra on X)
By गुलशन राय खत्री
दिल्ली बीजेपी की कमान अब हर्ष मल्होत्रा के हाथों में है। लेकिन नगर निगम चुनाव, सरकार-संगठन तालमेल और 2030 की तैयारी जैसी कई बड़ी चुनौतियां उनका इंतजार कर रही हैं।
New Delhi, May 28, 2026 — हाल के दशकों में दिल्ली के सबसे कामयाब कहे जाने वाले प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा की विदाई के बाद अब दिल्ली बीजेपी की कमान हर्ष मल्होत्रा को सौंपी गई है। मल्होत्रा ऐसे वक्त में प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालेंगे, जब दिल्ली में नगर निगम, दिल्ली सरकार और केंद्र में बीजेपी की सरकारें हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि अध्यक्ष बनने के बाद उनके लिए बड़ा संकट नहीं होगा लेकिन सच्चाई ये नहीं है।
सच ये है कि मल्होत्रा को आने वाले वक्त में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इनमें अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव से लेकर सरकारों व संगठन के बीच समन्वय बनाना शामिल है।
अगर जातिगत समीकरणों के नजरिए से देखा जाए तो जिस तरह से सचदेवा पंजाबी समुदाय से आते हैं, वैसे ही मल्होत्रा भी पंजाबी समुदाय से हैं। अगर मनोज तिवारी को छोड़ दें तो अमूमन बीजेपी दिल्ली में वैश्य या पंजाबी समुदाय के हाथ में कमान सौंपती रही है। चूंकि इस समय दिल्ली में मुख्यमंत्री और विधानसभा स्पीकर का पद वैश्य समुदाय के नेताओं के पास है। ऐसे में जाहिर है कि दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी पंजाबी नेता को ही दी गई है। वैसे बीजेपी के जानकार मानते हैं कि इस पद के लिए कुछ साल पहले भी मल्होत्रा के नाम पर सहमति बनी थी लेकिन उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की बजाए लोकसभा चुनाव लड़ाया गया और फिर केंद्र सरकार में राज्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया।
मल्होत्रा की चुनौतियां : पार्टी ने अपने सबसे पुराने और अनुभवी हर्ष मल्होत्रा पर दांव लगाया है। मल्होत्रा की पहली परीक्षा दिल्ली नगर निगम के चुनाव होने हैं। पिछली बार 2022 में जब चुनाव हुए थे, उस समय बीजेपी कुछ अंतर से आम आदमी पार्टी से हार गई थी। हालांकि उसके बाद धीरे धीरे आम आदमी पार्टी के पार्षदों के पाला बदलने से नगर निगम पर बीजेपी का कब्जा हो गया। लेकिन नगर निगम में हार की वजह से ही तत्कालीन प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया।
अब ऐसे में मल्होत्रा के लिए चुनौती होगी कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में इस तरह की रणनीति बने कि पार्टी को वहां जीत मिले। 2024 और 2025 में बीजेपी ने दिल्ली में पहले लोकसभा की सातों सीटें और फिर 27 साल बाद विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता में लौटी। ऐसे में जीत के इस क्रम को बनाए रखना मल्होत्रा के लिए सबसे अहम कार्य होगा।
अगले विधानसभा चुनाव तक बने रह सकते हैं मल्होत्रा : अगर मल्होत्रा की अगुवाई में दिल्ली नगर निगम के चुनाव में बीजेपी विजयी होती है और अन्य कोई समीकरण नहीं बदलते तो जाहिर है कि मल्होत्रा ही 2030 विधानसभा चुनाव तक इस पद पर बने रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है, जो 2029 तक रहेगा। उसके बाद विधानसभा चुनाव की तैयारी होंगी तो इसलिए उन्हें एक्सटेंशन दिया जा सकता है। ऐसे में मल्होत्रा को अगले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए भी अभी से तैयारी शुरू करनी होगी।
तालमेल करना जरुरी : मल्होत्रा के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी संगठन और सरकारी तंत्र में तालमेल बनाए रखने की भी होगी। नगर निगम और दिल्ली सरकार में बीजेपी का वर्चस्व है। दिल्ली के सभी सांसद भी बीजेपी के हैं और केंद्र में भी बीजेपी सरकार है। ऐसे में किसी भी पक्ष को नाराज किए बिना, उनमें और संगठन के बीच समन्वय बनाना जरुरी होगा। अगर ये तालमेल बिगड़ता है तो इससे पार्टी को ही आगे बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।
टीम बनाना : पद संभालने के बाद अब उन्हें सबसे पहले अपनी टीम बनाने के लिए सभी पक्षों से राय लेनी होगी। दिल्ली सरकार, सांसद और नगर निगमों में बीजेपी नेता ही सत्तारूढ़ हैं। ऐेसे में टीम बनाते वक्त उन्हें बैलेंस बनाना जरुरी होगा। संगठन महामंत्री पवन राणा भी बीते तीन साल से दिल्ली में हैं। ऐसे में अब उनकी भूमिका भी अहम होती जाएगी।
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