बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के 9 साल: लागत बढ़ी, कोच अटके, क्या टलेगी डेडलाइन?
National High Speed Rail Corporation Limited has lowered the second TBM cutterhead for the Mumbai-Ahmedabad High Speed Rail tunnel in Navi Mumbai. (Image Railways)
By गुलशन राय खत्री
अगस्त 2027 में सूरत-बिलिमोरा के बीच 100 किमी ट्रैक पर सेवा शुरू करने की तैयारी, लेकिन जापानी कोच, लागत वृद्धि और कानूनी बदलावों पर सवाल कायम
New Delhi, May 25, 2026 — लगभग चार महीने बाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के शिलान्यास को नौ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं लेकिन अभी भी 508 किमी के इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में लंबा वक्त लगने वाला है। हालांकि इस बीच सरकार ने तय किया है कि अगले साल यानी अगस्त 2027 में इस प्रोजेक्ट के अंतर्ग सूरत और बिलिमोरा के बीच एक सौ किमी के ट्रैक पर ट्रेन दौड़ना शुरू हो जाएगी और 2029 तक बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच दौड़ने लगेगी।
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या अगले साल तक बुलेट ट्रेन ही दौड़ेगी या फिर ट्रैक पर भारत में निर्मित ट्रेन ? पेंच यहीं फंसा है। अगर भारत सरकार इस एक सौ किमी पर अपनी ट्रेन चलाएगी तो क्या जापान के साथ किए गए करार में कोई अड़चन तो नहीं आएगी। दरअसल, कायदे से इस ट्रैक पर 350 किमी की रफ्तार वाली ट्रेन चलनी है। लेकिन इस ट्रेन को लेकर अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ। पहले भारत और जापान के बीच तय हुआ था कि भारत में ई5 कोच वाली बुलेट ट्रेन चलेगी लेकिन इस बीच जापान में इस तरह के कोच अब बनने बंद हो गए हैं। वहां अब ई 7 और ई8 तकनीक वाले कोच का निर्माण हो रहा है। अब भारत चाहता है कि उसे आधुनिक तकनीक के कोच मिल जाएं ताकि बाद में अपग्रेड न करना पड़े।
जापान से आने वाले कोच और ट्रेन में शायद वक्त लगे, इसी वजह से रेलवे ने अपने तैयार एक सौ किमी के नेटवर्क का उपयोग करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि भारत में ही 280 किमी की रफ्तार वाली ट्रेन का निर्माण हो रहा है। ऐसे में भारत अगले साल तक इस ट्रेन को बुलेट ट्रैन की पटरियों पर इसी ट्रेन को उतारकर सूरत व बिलिमोरा के बीच ट्रेन सर्विस शुरू कर सकता है।
लेकिन असली सवाल ये है कि बुलेट ट्रेन कब तक तैयार होगी। इस प्रोजेक्ट के साथ एक पेंच ये भी है कि इसकी लागत में लगभग 80 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया गया है। 2017 में जब इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ था, उस समय इसकी लागत एक लाख 8 हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी और इसे दिसंबर 2023 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन भूमि अधिग्रहण और तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार के हाथ खींचने की वजह से ये प्रोजेक्ट लेट हो गया। अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही इसका इंफ्रॉ्स्ट्रक्चर तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि अब इसकी डेडलाइन बढ़ाने की जरुरत नहीं होगी।
लेकिन इसके बावजूद अभी भी दो सवाल बने हुए हैं। एक इसकी लागत बढ़ने के बाद क्या इतना बड़ा वित्तीय बोझ खुद सरकार कैसे वहन करेगी और दूसरा पूरा इंफ्रॉ्स्ट्रक्चर तैयार करने के बाद क्या वक्त पर बुलेट ट्रेन के कोच भारत को जापान से मिल सकेंगे ? इन सवालों की बड़ी वजह यही है कि पहले कोच तैयार हों और फिर उन्हें भारत लाया जाए। उसके बाद उनका लंबे वक्त तक ट्रायल भी करना होता है। ऐसे में ट्रायल में भी वक्त लगेगा।
एक और अहम सवाल है कि क्या इतनी स्पीड पर ट्रेन चलाने के लिए भारतीय रेलवे के पास कानूनी अधिकार हैं ? जाहिर है कि इसके लिए सरकार को रेलवे एक्ट में संशोधन करना होगा ताकि 350 किमी की स्पीड पर ट्रेन चलाने के लिए अधिकार मिल सकें। ऐसे में जरुरी है कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की डेडलाइन मिस करने से बचाने के लिए सरकार को कई मोर्चों पर एकसाथ तेजी से काम करना होगा।
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