चंद्रमा पर बेस बनाने की होड़ तेज, अमेरिका-चीन के बीच नई स्पेस रेस शुरू
NASA said over the next 18 months, our selected providers – Astrolab and Lunar Outpost – will finalize designs for Moon rovers. (Image NASA on X)
By TRH News Desk
मून रेस 2.0: चंद्रमा पर बेस बनाने की होड़ में आमने–सामने अमेरिका और चीन
नई दिल्ली, 27 मई 2026 — चंद्रमा पर इंसानों की वापसी अब केवल वैज्ञानिक मिशन नहीं रह गई है, बल्कि यह अमेरिका और चीन के बीच एक नई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का रूप लेती दिख रही है। लक्ष्य अब सिर्फ चंद्रमा तक पहुंचना नहीं, बल्कि वहां स्थायी मौजूदगी और भविष्य के “मून बेस” स्थापित करना है।
अमेरिकी चंद्र कार्यक्रम से जुड़े हालिया बयान बताते हैं कि वॉशिंगटन चंद्रमा को एक अल्पकालिक मिशन की जगह दीर्घकालिक आधारभूत ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के रूप में देख रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका अपने अंतरराष्ट्रीय और व्यावसायिक साझेदारों के साथ मिलकर चंद्रमा पर बेस बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि यह काम एक बड़े “ग्लास डोम मून बेस” से शुरू नहीं होगा, बल्कि चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।
अमेरिका की रणनीति सावधानी पर आधारित है। अपोलो मिशनों के दौरान चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों का कुल ईवीए (स्पेसवॉक) समय केवल लगभग 80 घंटे रहा था और यह मिशन आधी सदी से अधिक पहले हुए थे। यही सीमित अनुभव अब अमेरिका को क्रमिक रणनीति अपनाने की ओर ले जा रहा है।
इस योजना के तहत अमेरिका पहले लैंडर, रोवर, तकनीकी प्रदर्शन मिशन और वैज्ञानिक पेलोड भेजेगा। अधिकारियों के अनुसार, चंद्र आधार से जुड़ी कम से कम तीन मिशनों पर चर्चा चल रही है, जबकि आने वाले महीनों में और मिशनों की घोषणा हो सकती है।
लेकिन इस पूरी कहानी का बड़ा पहलू भू-राजनीति है।
चीन पहले ही अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के जरिए चंद्रमा पर दीर्घकालिक रिसर्च स्टेशन की योजना आगे बढ़ा चुका है। बीजिंग की सोच अब केवल अन्वेषण नहीं बल्कि स्थायी उपस्थिति बनाने पर केंद्रित दिखाई देती है।
नई प्रतिस्पर्धा अब “पहले कौन पहुंचा” की नहीं बल्कि “पहले कौन टिकता है” की हो गई है।
विशेष रूप से चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव (लूनर साउथ पोल) रणनीतिक महत्व हासिल कर चुका है क्योंकि वहां जल-बर्फ (Water Ice) मिलने की संभावना है। यह भविष्य में मानव बस्तियों को समर्थन देने और रॉकेट ईंधन तैयार करने में उपयोगी हो सकता है।
अमेरिका अपनी रणनीति में निजी कंपनियों और सहयोगी देशों को शामिल कर रहा है, जबकि चीन राज्य-नेतृत्व वाले मॉडल पर आगे बढ़ रहा है।
अगर 20वीं सदी की स्पेस रेस चंद्रमा तक पहुंचने की थी, तो 21वीं सदी की नई दौड़ शायद इस सवाल पर तय होगी —चंद्रमा पर सबसे पहले स्थायी आधार कौन बनाता है?
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