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क्वाड की नई चाल: समुद्री सुरक्षा से मिनरल्स तक, नई दिल्ली बैठक क्यों अहम?

Indian External Affairs Minister S. Jaishankar with Quad foreign ministers at Hyderabad House in New Delhi.

Indian External Affairs Minister S. Jaishankar with Quad foreign ministers at Hyderabad House in New Delhi (Image MEA India)

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By TRH World Desk

विश्लेषण | क्वाड अब केवल संवाद मंच नहीं? नई दिल्ली बैठक ने हिंदप्रशांत में रणनीतिक बदलाव का संकेत दिया

New Delhi, May 27, 2026 — नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की 11वीं बैठक को केवल एक नियमित कूटनीतिक आयोजन मानना भूल होगी। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के इस समूह ने इस बार जो संकेत दिए, वे बताते हैं कि क्वाड अब “बयान आधारित मंच” से आगे बढ़कर “ऑपरेशनल सहयोग” की दिशा में कदम रख रहा है। समुद्री निगरानी, क्रिटिकल मिनरल्स और फिजी पोर्ट प्रोजेक्ट— ये तीन घोषणाएं इसी बदलाव की कहानी कहती हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक की शुरुआत करते हुए क्वाड देशों को “समुद्री लोकतंत्र, बहुलतावादी समाज और बाजार अर्थव्यवस्थाएं” बताया। लेकिन उनके भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था “विश्वसनीय और पारदर्शी साझेदारी” पर जोर। यह बयान सीधे तौर पर चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं पर उठे सवालों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

जयशंकर का दूसरा संदेश आतंकवाद पर था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के प्रति “जीरो टॉलरेंस” होना चाहिए और हमले झेलने वाले देशों को जवाब देने का अधिकार है। यह बयान भारत के हालिया सुरक्षा दृष्टिकोण और ऑपरेशन सिंदूर के बाद की रणनीतिक सोच से जुड़ा माना जा रहा है।

इस बैठक का सबसे बड़ा परिणाम रहा इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (IPMSC) । इसका मकसद हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री निगरानी तंत्र विकसित करना है, जिससे क्वाड देश रियल-टाइम सूचना साझा कर सकें। इसका अर्थ है कि समुद्री गतिविधियों, जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा चुनौतियों पर एक साझा तस्वीर तैयार होगी।

रणनीतिक दृष्टि से यह बड़ा बदलाव है क्योंकि अब तक क्वाड पर आरोप लगता रहा कि यह केवल चर्चा मंच है। लेकिन साझा समुद्री ऑपरेटिंग सिस्टम की दिशा में कदम उठाना इसे व्यवहारिक सुरक्षा ढांचे की ओर ले जाता है।

दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव है। दुनिया में रेयर अर्थ और रणनीतिक खनिजों की सप्लाई पर चीन का प्रभुत्व लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उद्योग और ऊर्जा संक्रमण — सब इन खनिजों पर निर्भर हैं।

क्वाड का नया फ्रेमवर्क खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग में सहयोग बढ़ाएगा। इसका संदेश साफ है— आर्थिक सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है।

तीसरा संकेत फिजी पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से मिला। पिछले डेढ़ दशक में चीन ने प्रशांत क्षेत्र में बंदरगाहों, सड़कों और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के जरिए अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। अब क्वाड पहली बार सामूहिक रूप से प्रशांत क्षेत्र में भौतिक ढांचा निर्माण कर रहा है। यह केवल विकास परियोजना नहीं बल्कि भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया चरण है।

हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। भारत-अमेरिका व्यापार विवाद, ट्रंप प्रशासन की पाकिस्तान नीति और 2025 में टली क्वाड शिखर बैठक ने समूह की गति धीमी की थी। लेकिन नई दिल्ली बैठक ने यह संकेत दिया कि क्वाड अभी ठहरा नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत अब भी क्वाड को “इंडो-पैसिफिक नाटो” नहीं बल्कि बहुध्रुवीय व्यवस्था का मंच बताता है। यही संतुलन शायद इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी परीक्षा भी।

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